सीमेंट कंक्रीट के पोल ने खोली वन विभाग की पोल// कोंडागांव डीएफओ का जवाब भी गोलमोल
कोंडागांव— वन विभाग अपने कार्यों को लेकर हमेशा सुर्खियों में बना रहता है। विभाग के द्वारा कटीले तार एवं कंक्रीट पोल से जो घेरा बनाया जाता है वह भी हमेशा विवादों के घेरे में रहता है। ज्यादातर वन परिक्षेत्र में जहां सड़क किनारे वनों की सुरक्षा के लिए घेरा बनाया जाता है बमुश्किल 4- 6 महीना बाद ही वह घेरा तहस-नहस दिखाई देता है। इसके लिए वन विभाग के पास सीधा सपाट जवाब रहता है कि मवेशियों एवं जंगली जानवरों के चलते गिर गया होगा टूट गया होगा
कंक्रीट के पोल ने खोली विभाग की पोल
इस बार वन विभाग के कार्य ने विभाग की पोल ही खोल दी है। जहां सीमेंट कंक्रीट पोल एवं कटीले तार से बनाए जाने वाला घेरा बनने से पहले ही टूटना शुरू हो गया है सूत्रों ने बताया कि यह पूरा भ्रष्टाचार योजनाबद्ध तरीके से हो रहा है। इसके लिए जैम पोर्टल से खरीदी किए जाने का प्लान किया गया जिससे कि नियमों की दुहाई दी जा सके और अंत में ठीकरा वेंडर के सिर पर फोड़ा जा सके निम्न क्वालिटी का खंबा एवं कटीले तार की खरीदी में धांधली के लिए बड़द योजना बनाई गई है। इस संबंध में जब वन मंडल अधिकारी कोंडागांव चूड़ामणि सिंह से चर्चा की गई तो उन्होंने गोल-गोल जवाब देना शुरू कर दिया पहले वह अच्छी क्वालिटी की सामग्री होने की बात पर अड़े रहे जब बाद में फोटो वीडियो दिखा तब उन्होंने स्वीकार किया और उन्होंने हैरत अंग्रेज ढंग से कह दिया की जो खंबे खराब हैं उन्हें बदल दिया जाएगा जबकि वहां 50 से 60 फ़ीसदी खंबे खराब हैं बाकी खंबो के भी टूटने में कोई देरी नहीं है वन विभाग अपनी जेब में भरना चाहता है या वनों की सुरक्षा चाहता है