मुख्यमंत्री की घोषणा का लाभ मिलने में संशय
किसानों को अपनी ही जमा रकम को निकालना नहीं है आसान
कोंडागांव ( न्यूज़ )अमूमन यह देखा जाता है कि कोई भी खाता धारक बैंक में अपनी जमा रकम को निकालने और जमा करने के लिए स्वतंत्र है चाहे जितनी रकम वह बैंक से निकाल लेता है और जमा भी करता है किंतु क्षेत्र का एक बैंक ऐसा है जहां अपनी रकम को निकालने के लिए लोगों को कभी रतजगा करना पड़ता है तो कभी सुबह 5:00 बजे से उठकर बैंक जाने की तैयारी करनी पड़ती है। बावजूद खाता धारक को रकम मिलेगी इस बात की कोई गारंटी नहीं है। यह जिला सहकारी बैंक जिले के बड़े राजपुर ब्लॉक के विश्रामपुरी में स्थित है जहां धान बेचकर पैसा पाने के लिए लोगों का हुजूम लगता है। धान बेचने के 15 दिन बाद से यह पेशी शुरू होती है लोग सुबह से तैयारी करते हैं लोग 40 से 50 किलोमीटर दूर से बैंक में पहुंचते हैं। यहां पहले आओ पहले पाओ की स्थिति को देखकर लोग सुबह 7:00 बजे ही बैंक पहुंच जाते हैं ताकि उनका नंबर पहले आ सके।
ग्राम कोपरा निवासी डोमार सिंह नाग ने बताया कि वह 36 क्विंटल धान बेचा है जिसका रकम लगभग एक लाख 11हजार 6 सौ रुपये होता है जिसके लिए उसे अब तक छह बार आना पड़ा है और अभी कई बार और आना पड़ सकता है ग्राम खल्लारी के रामनाथ ने बताया कि वह 180 क्विंटल धान बेचा है और अब तक आठ बार बैंक आ चुका है और कितने बार उसे बैंक का चक्कर लगाना पड़ेगा यह सोचकर परेशान है। करमरी के ऐतु राम एवं ग्राम नौकाबेडा के जुग सिंह नेताम ने बताया कि वह सुबह 5 बजे से बैंक जाने के लिए तैयारी कर चुके थे क्योंकि सुबह-सुबह नाश्ता और भोजन भी नहीं बन पाता इसलिए वह भूखे प्यासे बैंक में आते हैं। 11:00 बजे बैंक खुलता है, बैंक वाले बताते हैं कि उनका कंप्यूटर सिस्टम धीरे चलता है जिसके चलते दिनभर बैंक में ही लग जाता है कभी-कभी 7:00 से 8:00 बजे रात को पैसा मिलता है और लोग 9 बजे रात तक घर पहुंचते हैं। ऐसी स्थिति भी निर्मित हो जाती है कि कभी रिश्तेदार के घर में सहारा लेना पड़ता है ताकि दूसरे दिन सुबह घर पहुंच सके क्योंकि रकम लेकर रात्रि में मोटरसाइकिल से सफर करना खतरे से खाली नहीं है।
सप्ताह में एक बार ही मिलती है राशि
जिला सहकारी बैंक ने ऐसा सिस्टम बना कर रखा है कि अलग-अलग गांव के लिए अलग-अलग दिन निर्धारित किया गया है जिससे एक गांव के व्यक्ति को सप्ताह में एक ही दिन पैसा मिल सकेगा चाहे उसे घर में शादी ब्याह अस्पताल या कोई अन्य अतिआवश्यक जरूरत भी पड़ जाए तो बैंक वाले टस से मस नहीं होते। बता दें कि यह समस्या हर बार धान बेचने के बाद ही निर्मित होती है।
मुख्यमंत्री की घोषणा का नहीं मिलेगा लाभ
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद अब किसानों के खाते में धान की अंतर की राशि के रूप में बड़ी रकम आने वाली है। मुख्यमंत्री ने तो कह दिया है कि एक मुश्त रकम डाल दिया जाएगा किंतु यहां लोगों को 10 से 20 हजार रुपये ही मिलेंगे। इसे लेकर किसान चिंतित हैं। ऐसा नहीं कि किसानों ने इसकी शिकायत किसी से नहीं की है विधायक से लेकर मंत्री एवं उच्च अधिकारियों को भी कई बार मामले की शिकायत की जा चुकी है। कई बार धरना और चक्का जाम की नौबत भी आ जाती है किंतु व्यवस्था में सुधार नहीं किया जाता। जिससे ग्रामीणों को उनका पैसा सही वक्त पर जरूरत के समय नहीं मिल पाता और लोग यहां वहां से उधारी लेकर काम चलाते हैं।
