कृषि विभाग में शिकायतों का अंबार लगा है एक शिकायत की जांच नहीं हो पाती की दूसरी शिकायत शुरू हो जाती है। कृषि विभाग के रवैया को देखकर लगता है कि विभाग ने ठान लिया है कि किसी भी मामले को जांच की पूर्णता तक नहीं पहुंचाना है। यदि इनको एक साल बाद भी पूछें की शिकायत की जांच का क्या हुआ तो एक ही जवाब आता है अभी जांच चल रही है।
उपसंचालक कोंडागांव ने सूचना के अधिकार का तो बंटाधार ही कर दिया है बिना अपील के यहां जानकारी नहीं मिलती। कोंडागांव जिला ही नहीं बल्कि अन्य जिलों में भी विभाग की शिकायतों का अंबार लगा है विभाग के अधिकारी जांच के नाम पर लीपा पोती कर रहे हैंः मामला चाहे खाद बीज का हो नलकूप खनन का हो भूमि संरक्षण का हो या वाटरशेड का सब की स्थिति एक जैसी है। कृषि उपसंचालक विवादों एवं आरोपों में घिरे हैं। विभाग के अधीनस्थ अधिकारी कर्मचारियों पर उनका कोई नियंत्रण नहीं है। विभाग में फाइलें धूल खाती पड़ी रहती हैं। एक काम के लिए लोगों को यहां कई चक्कर लगाना पड़ता है परेशान होकर लोग संयुक्त संचालक जगदलपुर के पास पहुंचते हैं किंतु उनकी स्थिति भी इनसे ज्यादा खराब है। वह लंबे समय से संभाग मुख्यालय में डटे हैं विभाग उनका तबादला भूल गया है और तो और चुनाव के वक्त भी विभाग उनके तबादले को याद नहीं करता संयुक्त संचालक की स्थिति ऐसी है कि वह ठान लिए हैं कि उनका रिटायरमेंट जगदलपुर से ही होगा।
