कृषि उपसंचालक एवं दुकानदार के खिलाफ युवती पहुंची महिला आयोग
राजीनामा एवं बार-बार पेशी बुलाकर प्रताड़ना का आरोप
कडागांव (नई दुनिया न्यूज़)बीज अंकुरित नहीं होने से दुकानदार के खिलाफ कृषि विभाग में शिकायत करना किसानों को महंगा साबित हो रहा है।
कृषि विभाग के अधिकारियों के रवैये से परेशान होकर महिला कृषक ने विभाग पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए महिला आयोग का रुख किया है वहीं एक किसान बलराम यादव का पेशी जाते-जाते सड़क दुर्घटना में पैर फैक्चर हो चुका है।
बड़े राजपुर क्षेत्र के किसानों ने लिखित शिकायत किया था इसके अलावा कई लोगों ने मौखिक शिकायत भी किया था किंतु कृषि विभाग के द्वारा केवल एक युवती को ही बार-बार पेशी पर बुलाया जा रहा है जबकि एक जैसा शिकायत होने के बावजूद अन्य किसानों को नजरअंदाज करते हुए कह दिया कि बाकी किसान राजीनामा के लिए हस्ताक्षर कर चुके हैं जबकि किसानों ने बताया कि उन्हें किसी प्रकार का न तो मुआवजा मिला है न ही उन्होंने राजीनामा के कागज पर हस्ताक्षर किया है वे आज भी अपनी शिकायत पर कायम हैं।
युवती सरस्वती शार्दुल एवं तीन अन्य किसान बलराम यादव भागवत नेताम एवं गिरवर निवासी सभी बांसकोट ने शिकायत किया था कि उन्होंने मारंगपुरी के एक दुकानदार से पायनियर कंपनी का धान बीज खरीद कर नर्सरी डाला था उनका धान बीज नाम मात्र भी अंकुरित नहीं हुआ जिससे उन्हें धान की पैदावार में जबरदस्त नुकसान होना तय है। साथ ही बीज अंकुरित नहीं होने से उन्हें दोबारा नर्सरी डालना पड़ा था उन्हें अमानक बीज थमा दिया गया और बिल भी नहीं दिया गया। किसानों ने दुकानदार के द्वारा दिए गए बीज़ को नकली बताया है और इसकी शिकायत कृषि विभाग के अधिकारियों को किया गया था।कृषि विभाग के अधिकारियों ने पहले तो राजीनामा के लिए दबाव बनाया और लगातार शिकायत करने से मना करते रहे किंतु जब किसान कलेक्टर कोंडागांव नूपुर राशि पन्ना के पास पहुंचे तो कलेक्टर ने मामले की गंभीरता से लेते हुए कृषि विभाग को जांच का आदेश दिया। तब जाकर कृषि विभाग ने जांच शुरू की। किंतु फिर एक बार कृषि विभाग की मनमानी सामने आई जब पुरुष आवेदकों को हटाकर केवल एक युवती के नाम से ही नोटिस निकाला तथा उन्हें अपने गांव से 70 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय कोंडागांव में बार-बार पेशी बुलाकर प्रताड़ित किया जा रहा है।
कई बार बीज कंपनी और दुकानदार पेशी पर नहीं पहुंचते किंतु शिकायतकर्ता युवती साधन नहीं होने के बावजूद पेशी पर पहुंचती है तथा देर रात तक किसी के साथ लिफ्ट का सहारा लेकर वापस घर पहुंचती है युवती ने बताया कि उसके घर में खेती किसानी के लायक कोई पुरुष सदस्य नहीं होने से वह स्वयं ही खेती का कार्य देखती है और वह प्रतिवर्ष 10 एकड़ में धान की पैदावार लेकर स्वयं एवं अपनी बीमार मां का पालन पोषण करती है। जब धान बीज अंकुरित नहीं हुआ तो वह किसानों के साथ पहले दुकानदार से संपर्क किया तथा उन्होंने दुकानदार को बताया कि उनके द्वारा दिया गया धान बीज अमानक है उनके साथ तीन अन्य किसानों ने भी दुकानदार से शिकायत की किंतु दुकानदार ने साफ कह दिया कि इसमें उसका कोई गलती नहीं है वह जहां चाहे शिकायत कर सकते हैं तब किसानों ने उन्हें बिल की मांग की तो दुकानदार ने बिल देने से भी साफ मना कर दिया तत्पश्चात किसानों ने प्रशासनिक अधिकारियों से मामले की शिकायत की किंतु उन्हें यह पता नहीं था कि उन्हें बार-बार पेशी बुलाकर परेशान किया जाएगा। सरस्वती ने बताया कि वह अधिकारियों से निवेदन कर चुकी है कि गांव में पहुंच कर उनका बयान लिया जाए क्योंकि कोंडागांव जाने आने के लिए आवागमन का कोई साधन नहीं है और यदि जाने के समय सुविधा मिल भी जाती है तो आते समय रात्रि तक घर पहुंचना होता है किंतु अधिकारियों ने उसके निवेदन को अनसुना कर दिया और कहा कि शिकायत करते हो तो पेशी पर आना स्वयं की जिम्मेदारी है।यदि पेशी पर नहीं आना है तो एक तरफा कार्रवाई किया जाएगा जिसकी जिम्मेदारी शिकायतकर्ता की होगी जिससे वह प्रताड़ित महसूस करते हुए महिला आयोग मेंं आनलाइन शिकायत कर चुुकी है।
